पंख फैला कर उड़ने दो

508

इन चिड़ियों को नील गगन में जरा पंख फैला कर उड़ने दो।
आसमान की हवा की ठंडी दस्तक इनको सुनने दो।।
मत कैद करो पिंजड़े में इन आज़ादी के परवानो को।
बादलों के स्वर्गलोक में पंख घुमा कर उड़ने दो।।
जरा पंख फैला कर उड़ने दो।।

इनको लहराती फसलों के नन्हे दाने चुगने दो।
ठंडा नीला साफ नदी का पानी उनको पीने दो।।
तिनका तिनका जोड़ के आपना नीड़ इनको बुनने दो।
खुले नीले आसमान में पंख खोल के उड़ने दो।।
जरा पंख फैला कर उड़ने दो।
मत कैद करो इन्हें पिजड़े में
जरा खुली हवा में उडने दो।।
इन पंछियो को भी हाँ अपने मन की करने दो ।
मत कैद करो ,आजाद करो ।
जरा खुले गगन में उड़ने दो।।

जरा पंख घुमा कर उड़ने दो।
जरा पंख फैला कर उड़ने दो।।
कहते हैं ये पक्षी हमसे,
पिजड़े में मिले पकवानों से तो भूखा रहना बेहतर है।
इस प्याली में जल पीने से प्यासा रहना बेहतर है।।
मत कैद करो ,आजाद करो
खुले नीले आसमान में हमे पंख घुमा कर उड़ने दो।
जरा पंख फैला कर उड़ने दो।।

अगर अब भी तुम नहीं रुके
तो आकाश को सूना पाओगे।
आँगन से चिरईया गायब होगी,
बहुत तुम पछताओगे।
बुलबुल का गीत न मिल पायेगा।
मिट्ठू के लिए आंसू बहाओगे।।

कोयल न पेड़ पर गायेगी,
मोर के नृत्य के लिए पछताओगे।
अभी भी समय है बदल जाओ,
वरना धरती अम्बर सूना पाओगे।।
इसलिए मैं कहता हूं…..
मत कै़द करो, आजाद करो।
ज़रा खुली हवा में उड़ने दो।
ज़रा पंख घुमाकर उड़ने दो।।
ज़रा पंख फैला कर उड़ने दो।

दिवित त्रिपाठी,
कक्षा 7
दिल्ली पब्लिक स्कूल, आज़ाद नगर, कानपुर

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here