दुआ

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एक अदृश्य शक्ति
एक झंझावात
बन्द किवाड़े
अकेले में अकेला मानव
हे प्रकृति
बहुत हुआ
बेज़ुबानों संग खिलवाड़
कर रहे दुआ
कर हज़ार
है तुझ पर सबका अधिकार
अब न होगा अत्याचार।

=>डॉ आर के सिंह, कानपुर प्राणिउद्यान, कानपुर

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