कुछ ऐसा…

337

बातें कुछ मीठी ऐसी बना दो,
दर्द में जो मरहम बन जाए ।
गीत पुलकित कोई ऐसा गुनगुना दो ,
ग़म सारा जिससे दूर हो जाए ।
यादें सुनहरी कुछ ऐसी बना दो ,
खुद के होने को जिससे भूल जाएँ ।
प्रीत अमर कुछ ऐसी लगा लो ,
लबों पे मुस्कराहट जिससे ठहर जाए ।
पुष्प रंगीन कोई ऐसा खिला दो ,
रंग जिसके सब रूह में बिखर जाएँ ।
ख़्वाब हक़ीक़त में कोई ऐसा सजा दो ,
अर्थ जिससे ज़िन्दगी का मिल जाए ।
साथ भरोसे से; कुछ ऐसा निभा दो ,
इश्क़ जिससे ये मुक्कम्मल हो जाए ।।

~ प्राची द्विवेदी ~

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here