छुट्टी का भाव

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कल छुट्टी होगी। या फिर लंबी छुट्टी लेंगे। आराम करेंगे। कहीं बाहर जाएंगे। यह सोचकर मन कितना आह्लादित होता है। खुश होता है । छुट्टी का भाव मात्र मन को आनंद, विलास और मनोरंजन के क्षणों से गदगद कर देता है। लेते चले कुछ समय के लिए राहत मिलेगी यह विचार तन मन में सरसरी पैदा कर देता है। लगता है छुट्टी के बाद शरीर नई स्फूर्ति और शक्ति से प्रेरित होकर जीवन की कार्यशाला में जुट जाएगा।

लेकिन यह तब तक संभव हो सकेगा? जब छुट्टी को पूरी बेफिक्री और निश्चितता से मनाने के लिए मन कटिबद्ध होगा। अन्यथा छुट्टी से संजोए आनंद के सपने मृग मरीचिका बनकर रह जाएंगे। छुट्टी का संपूर्ण आनंद तब मिलेगा जब छुट्टी के दिनों में नित्य-प्रतिदिन के कार्यों की कतरनों या विचारों के कूड़ा करकट को एक कोने में छोड़ दे। यह भूल जायँ की स्मृति भी कोई चीज है। प्रत्येक भूत की वस्तु को भुला दें और भविष्य के अनदेखे भय से मुक्त हो जायें।

व्यक्ति की सबसे बड़ी कमजोरी है कि वह भूतकाल में अधिक विचरण करता है। अनदेखे भविष्य के प्रति आश्वस्त होना चाहता है। वर्तमान में बहुत कम रहना चाहता है।
छुट्टी का आनंद उठाने के लिए वर्तमान में रहना जरूरी है चिंताओं से मुक्त होना। छुट्टी के दिन के पहले क्या हुआ था या क्या होना था इस विचार से स्वतंत्र हो जाना। छुट्टी के महोत्सव में मन-मस्तिष्क को जितना निढाल छोड़ा जाएगा, मन्द रहने दिया जाएगा उतना ही छुट्टी का आनंद प्राप्त होगा।

ऐसे व्यक्ति जो छुट्टी के सफर में भी समस्याओं, परेशानियों एवं अपनी असफलताओं का असबाब बांधकर निकलते हैं वह छुट्टी का लुत्फ नहीं उठा सकते। वह छुट्टी का आनंद प्राप्त नहीं कर सकते। छुट्टी का आनंद पूरी तल्लीनता से उठाना है तो छुट्टी वाले दिन समाचार पत्र को भी अलविदा कहना होगा। यह भूलना होगा कि समाचार पत्र में खबर क्या थी। छुट्टी मायने पूरी छुट्टी। प्रत्येक कार्य से छुट्टी। विचारों की भीड़ से छुट्टी। सिर्फ छुट्टी के पलों को भरपूर जीने की तमन्ना छुट्टी को सार्थकता प्रदान कर सकती है।

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