सावधानी

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सावधानी किससे ?
दोस्त या दुश्मन से ?
दोस्ती –
स्वार्थ से भरी
मानो विष की बेल !
और दुश्मनी –
मरने-मारने का खेल
यूं तो नजर
दुश्मन पर
खुद ही रहती है बनी
पर , हमें बचना है उनसे
जो दोस्ती की आड़ में
निभाते हैं दुश्मनी ।

  • मोहिनी तिवारी

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