सपनें का फूल

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एक फूल जो रात सपनें में मैने देखा ,
मानों रोके वह कुछ मुझसे कह रहा हो।
आईना झूठ मगर सच था जो मेरा चेहरा,
टूटे तारों की तरह उसको बिखरता देखा।

फूल की पंखुड़ी को जो मुरझाया पाया,
झड़ के उसे भूमि पर गिरता देखा।
कहते हैं दर्द उसको भी बहुत था मगर,
अश्रु गिरते हैं सो अश्रु को बहता देखा।

  • अनुराधा श्रीवास्तव

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