मेरी ज़िन्दगी में …

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कुछ फूल हैं जो खिलने अभी बाकी है, कुछ उमर है जो ढलना अभी बाकी है।
कुछ स्वर हैं जिनका लय में होना बाकी है, कुछ प्यार है जो मुकम्मल होना अभी बाकी है।
कुछ सवाल हैं जो पूछना अभी बाकी है, कुछ पूछे सवालों के जवाब मिलना अभी बाकी है।
कुछ ज़ख्म है जो भरना अभी बाकी है, कुछ उम्मीदें हैं जो पूरी होना अभी बाकी है।
कुछ दूर का कुछ पास होना अभी बाकी है, कुछ अरमानों का पूरा होना अभी बाकी है।
कुछ कविताओं के अर्थ मिलना अभी बाकी हैैं, कुछ माँ की ख़ुशी का पूरा होना अभी बाकी है।
पापा की बात का मान अभी बाकी है, दीदी के विश्वास का सम्मान अभी बाकी है।
कुछ एहसासों का समझा जाना अभी बाकी है, रुलाए हुए लोगों को हसाना अभी बाकी है।
ज़िंदगी की दौड़ में अपनों को साथ लेना अभी बाकी है, छूटे हुए हाथों को थामना अभी बाकी है।
हर ख़्वाब भी पूरे नहीं होते, फिर भी नए ख़्वाबों का देखना अभी बाकी है।
ये जो ‘कुछ बाकी है’ ना, गवाही देता जो एक अधूरेपन की, उसे पूरा करना भी तो बाकी है।
और इस तरह ज़िंदगी में चैन-ओ- सुकून का आना अभी बाकी है….

~ प्राची द्विवेदी ~

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