प्रेम ऐसा हो

388

प्रेम ऐसा हो –
जैसे हवा का झोंका –
होता है
पर, दिखता नहीं –
छूकर हृदय के तार
फ़िजा में महकता
पर, मुठ्ठी के शिकंजे में –
टिकता नहीं
हजारों जतन सब खा़क हो जाते
पर, दिखावे की दुनिया में –
बिकता नहीं ।

  • मोहिनी तिवारी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here